Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
कहानी सबसे महंगे डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚ट की: पिसà¥à¤¤à¤¾ आखिर इतना महंगा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है? इसकी वजह जानकर चौंक जाà¤à¤‚गे
पिसà¥à¤¤à¤¾ (Pistachio) को सबसे महंगा डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚ट (Dry Fruit) कहा जाता है, पर कà¤à¥€ सोचा है कि यह इतना महंगा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है. विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ कहता है, पिसà¥à¤¤à¤¾ की खेती करना और इसके पेड़ों की देखà¤à¤¾à¤² करना आसान नहीं होता. पिसà¥à¤¤à¤¾ की कीमत इतनी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ं होती है और यह कितना फायदेमंद है, जानिठइन सवालोंं के जवाब
पिसà¥â€à¤¤à¤¾ (Pistachio) को सबसे महंगा डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚ट (Dry Fruit) कहा जाता है, पर कà¤à¥€ सोचा है कि यह इतना महंगा कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ होता है. विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ कहता है, पिसà¥â€à¤¤à¤¾ की खेती करना और इसके पेड़ों की देखà¤à¤¾à¤² करना आसान नहीं होता. मामला सिरà¥à¤« देखà¤à¤¾à¤² तक ही सीमित नहीं है, पिसà¥â€à¤¤à¤¾ के पेड़ (Pistachio Tree) में फल आने में 15 से 20 साल लग जाते हैं. इसके अलावा à¤à¥€ कई à¤à¤¸à¥€ वजह हैं जो इसकी कीमत को बढ़ाती हैं और डिमांड के मà¥à¤•ाबले इनकी सपà¥â€à¤²à¤¾à¤ˆ पूरी नहीं हो पाती. कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ और बà¥à¤°à¤¾à¤œà¥€à¤² समेत दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कई हिसà¥â€à¤¸à¥‹à¤‚ में बड़े सà¥â€à¤¤à¤° पर इनकी खेती की जा रही है.
15 साल बाद ही à¤à¤• पेड़ से 22 किलो पिसà¥â€à¤¤à¤¾ मिलता है
सेंटà¥à¤°à¤² इंसà¥â€à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚à¥à¤Ÿ ऑफ मेडिसिनल à¤à¤‚ड à¤à¤°à¥‹à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• पà¥â€à¤²à¤¾à¤‚ट (CSIR) के विशेषजà¥à¤ž आशीष कà¥à¤®à¤¾à¤° के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 15 से 20 साल à¤à¤• पेड़ को तैयार होने के बाद किसान को इससे बहà¥à¤¤ कम मातà¥à¤°à¤¾ में ही पिसà¥â€à¤¤à¤¾ मिलता है. औसतन à¤à¤• पेड़ से à¤à¤• साल में 22 किलो पिसà¥â€à¤¤à¤¾ मिलता है. पिसà¥â€à¤¤à¤¾ की मांग के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• हमेशा ही इसका उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ काफी कम रहता है. बà¥à¤°à¤¾à¤œà¥€à¤² ही à¤à¤¸à¤¾ देश है, जहां की सà¥à¤¥à¤¿â€à¤¤à¤¿ थोड़ी अलग है, यहां हर साल à¤à¤• पेड़ से करीब 90 किलो पिसà¥â€à¤¤à¤¾ का उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किया जाता है.
इसलिठबढ़ जाती है पिसà¥â€à¤¤à¤¾ की कीमत
रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पिसà¥â€à¤¤à¤¾ को बोने के 15 से 20 साल बाद इसमें फल आने शà¥à¤°à¥‚ होते हैं. इनसे ही पिसà¥â€à¤¤à¤¾ तैयार होता है. इतने सालों तक इन पेड़ों की देखà¤à¤¾à¤² करनी पड़ती है, इसमें काफी अधâ€à¤¿à¤• खरà¥à¤š आता है. देखà¤à¤¾à¤² के बाद à¤à¥€ इस बात की गारंटी नहीं होती है कि पेड़ों से उमà¥â€à¤®à¥€à¤¦ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• पिसà¥â€à¤¤à¤¾ तैयार होंगे. इसका उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करना इतना à¤à¥€ आसान नहीं होता. इसके लिठजà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी, जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मजदूर, जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जमीन और अधâ€à¤¿à¤• पैसे की जरूरत होती है. इस तरह इनकी कीमत à¤à¥€ बढ़ जाती है.
हर साल नहीं होती पैदावार
किसानों को इसकी खेती के लिठअधâ€à¤¿à¤• जमीन खरीदनी पड़ती है और जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेड़ लगाने पड़ते हैं, हालांकि उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ नाममातà¥à¤° का ही होता है. इससे à¤à¥€ जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खास बात यह है कि पेड़ों में हर साल पिसà¥â€à¤¤à¤¾ नहीं आते. इसलिठकिसानों को इसकी दो फसल लगानी पड़ती हैं, जिनमें à¤à¤•-à¤à¤• साल छोड़कर पैदावार होती है. इसलिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ पेड़ होने के बावजूद à¤à¥€ मांग के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पिसà¥â€à¤¤à¤¾ का उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ नहीं हो पाता.
बड़े सà¥â€à¤¤à¤° पर मजदूरों की जरूरत पड़ती है
पिसà¥â€à¤¤à¤¾ की खेती के लिठबड़े सà¥â€à¤¤à¤° पर शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों की जरूरत होती है. à¤à¤•-à¤à¤• पिसà¥â€à¤¤à¤¾ को हाथों से तोड़ा जाता है और साफ किया जाता है. कà¥â€à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ अलग किया जाता है. इनकी छंटाई के दौरान यह à¤à¥€ देखा जाता है कि किसे निरà¥à¤¯à¤¾à¤¤ के लिठà¤à¥‡à¤œà¤¾ जाà¤à¤—ा और किसे रखा जाà¤à¤—ा. इस तरह इनकी छंटाई के लिठशà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों को दी जाने वाली मजदूरी के कारण इनकी लागत और बढ़ जाती है.
कई तरह के पोषक ततà¥â€à¤µ होने के कारण पिसà¥â€à¤¤à¤¾ फायदेमंद होता है. इसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, पोटेशियम, विटामिन-बी6 और कॉपर पाया जाता है. हेलà¥â€à¤¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ की रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पिसà¥â€à¤¤à¤¾ वजन, बà¥â€à¤²à¤¡ शà¥à¤—र और कोलेसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को कम करने के साथ आंखों को सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रखता है.
| --------------------------- | --------------------------- |