दुनिया का सबसे महंगा ड्राई फ्रूट क्या है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 09:17

कहानी सबसे महंगे ड्राई फ्रूट की: पिस्ता आखिर इतना महंगा क्यों होता है? इसकी वजह जानकर चौंक जाएंगे
पिस्ता (Pistachio) को सबसे महंगा ड्राई फ्रूट (Dry Fruit) कहा जाता है, पर कभी सोचा है कि यह इतना महंगा क्यों होता है. विज्ञान कहता है, पिस्ता की खेती करना और इसके पेड़ों की देखभाल करना आसान नहीं होता. पिस्ता की कीमत इतनी ज्यादा क्योंं होती है और यह कितना फायदेमंद है, जानिए इन सवालोंं के जवाब

पिस्‍ता (Pistachio) को सबसे महंगा ड्राई फ्रूट (Dry Fruit) कहा जाता है, पर कभी सोचा है कि यह इतना महंगा क्‍यों होता है. विज्ञान कहता है, पिस्‍ता की खेती करना और इसके पेड़ों की देखभाल करना आसान नहीं होता. मामला सिर्फ देखभाल तक ही सीमित नहीं है, पिस्‍ता के पेड़ (Pistachio Tree) में फल आने में 15 से 20 साल लग जाते हैं. इसके अलावा भी कई ऐसी वजह हैं जो इसकी कीमत को बढ़ाती हैं और डिमांड के मुकाबले इनकी सप्‍लाई पूरी नहीं हो पाती. कैलिफोर्निया और ब्राजील समेत दुनिया के कई हिस्‍सों में बड़े स्‍तर पर इनकी खेती की जा रही है.
15 साल बाद ही एक पेड़ से 22 किलो पिस्‍ता मिलता है

सेंट्रल इंस्‍टीट्यू्ट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्‍लांट (CSIR) के विशेषज्ञ आशीष कुमार के मुताबिक, 15 से 20 साल एक पेड़ को तैयार होने के बाद किसान को इससे बहुत कम मात्रा में ही पिस्‍ता मिलता है. औसतन एक पेड़ से एक साल में 22 किलो पिस्‍ता मिलता है. पिस्‍ता की मांग के मुताबिक हमेशा ही इसका उत्‍पादन काफी कम रहता है. ब्राजील ही ऐसा देश है, जहां की स्थि‍ति थोड़ी अलग है, यहां हर साल एक पेड़ से करीब 90 किलो पिस्‍ता का उत्‍पादन किया जाता है.
इसलिए बढ़ जाती है पिस्‍ता की कीमत

रिपोर्ट के मुताबिक, पिस्‍ता को बोने के 15 से 20 साल बाद इसमें फल आने शुरू होते हैं. इनसे ही पिस्‍ता तैयार होता है. इतने सालों तक इन पेड़ों की देखभाल करनी पड़ती है, इसमें काफी अध‍िक खर्च आता है. देखभाल के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं होती है कि पेड़ों से उम्‍मीद के मुताबिक पिस्‍ता तैयार होंगे. इसका उत्‍पादन करना इतना भी आसान नहीं होता. इसके लिए ज्‍यादा पानी, ज्‍यादा मजदूर, ज्‍यादा जमीन और अध‍िक पैसे की जरूरत होती है. इस तरह इनकी कीमत भी बढ़ जाती है.
हर साल नहीं होती पैदावार

किसानों को इसकी खेती के लिए अध‍िक जमीन खरीदनी पड़ती है और ज्‍यादा पेड़ लगाने पड़ते हैं, हालांकि उत्‍पादन नाममात्र का ही होता है. इससे भी ज्‍यादा खास बात यह है कि पेड़ों में हर साल पिस्‍ता नहीं आते. इसलिए किसानों को इसकी दो फसल लगानी पड़ती हैं, जिनमें एक-एक साल छोड़कर पैदावार होती है. इसलिए पर्याप्‍त पेड़ होने के बावजूद भी मांग के मुताबिक, पिस्‍ता का उत्‍पादन नहीं हो पाता.
बड़े स्‍तर पर मजदूरों की जरूरत पड़ती है

पिस्‍ता की खेती के लिए बड़े स्‍तर पर श्रमिकों की जरूरत होती है. एक-एक पिस्‍ता को हाथों से तोड़ा जाता है और साफ किया जाता है. क्‍वालिटी के मुताबिक उन्‍हें अलग किया जाता है. इनकी छंटाई के दौरान यह भी देखा जाता है कि किसे निर्यात के लिए भेजा जाएगा और किसे रखा जाएगा. इस तरह इनकी छंटाई के लिए श्रमिकों को दी जाने वाली मजदूरी के कारण इनकी लागत और बढ़ जाती है.

कई तरह के पोषक तत्‍व होने के कारण पिस्‍ता फायदेमंद होता है. इसमें प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन-बी6 और कॉपर पाया जाता है. हेल्‍थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिस्‍ता वजन, ब्‍लड शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने के साथ आंखों को स्‍वस्‍थ रखता है.

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